Saturday, 10 November 2018

Networking (नेटवर्किंग)


*नमस्कार दोस्तो आज फिर से दिल मे आग लगी तो आपके लिए कुछ संदेश देना चाहता हु अगर पर्याप्त समय है तो एक बार पूरा जरूर पढिये USD भारतीय CURRENCY से कम होने का सबसे बड़ा रण है खुद भारतीय किसी भी काम मे भारत USA से आगे नही है सिर्फ लोगो की निंदा करने में होनहार और काबिल लोगो को आगे बढ़ने से रोकने में भारत विश्वप्रसिद्ध है। जागो भारतवासियों जागो वरना TECHNOLOGY का जो तूफान आएगा *2025* में न तो नौकरी रहेगी और ना ही पर्याप्त पैसा। (वाशिंगटन डीसी) में GOOGLE और टेस्ला जैसी बड़ी कंपनियों ने ड्राइवर लेस्स कार चला रही हैं यानी 2025 तक गाड़ियों में ड्राइवर नही होंगे। दुनिया के बड़े बड़े होटलों में वेटर की जगह रोबॉट देखने को मिल रहे हैं मतलब *2025* तक वेटर की नौकरी भी सलामत नही रहेगी आज अगर आप इंजीनियरिंग में अपना कैरियर बना रहे हैं तो रोबॉटिक्स में जाओ वरना इसके अलावा हर काम के लिए रोबोट्स ही काफी है। अगर आज आप कोई भी कम्प्यूटर पर आधारित Job कर रहे हैं तो मल्टीटास्किंग करने की Practice शुरू कर दीजिये वरना ज्यादा दिन नही है अपनी नौकरी से निकाल दिए जाओगे अगर अभी भी दिमाग नही खुला तो जीवन भर पछतावे के अलावा कुछ नही बचेगा अब भी समय है उस काम मे समय लगाओ जो काम इंसान के अलावा कोई नही कर सकता *1.डॉक्टर बन जाओ* *2.न्यूज़ एंकर या रिपोर्टर बन जाओ* और अगर ये सब नही बन सकते तो रास्ता साफ है *#नेटवर्कर बन जाओ* क्योंकि भविष्यवाणी यही कहती हैं आने वाले समय मे सिर्फ नेटवर्कर ही अपनी जिंदगी सुकून से जी सकता है नेटवर्कर के पास पर्याप्त समय है वो अपने परिवार अपने दोस्तों अपने बच्चों अपने माता पिता को पूरा समय देते हुए भी आराम से अपनी आय को सुरक्षित रख सकता है और अभी समय है भारत के विकास में अपना सही योगदान देने का नौकरी के लिए भटकना बन्द करो सरकार चाह कर भी सबको रोजगार नही दे सकती क्योंकि वो जानती हैं सबको रोजगार मिल गया तो *किसान अनाज नही उगाएगा* *सब्जी दूध और किराना दुकान सब बन्द हो जाएगा* शरीर के साथ अपनी बुद्धि का भी विकास कीजिये अन्यथा जिंदगी में कभी सफल नही हो सकते *बातें कड़वी जरूर है मगर यही हक़ीक़त है* आज अभी इसी वक्त अगर आप ये संदेश पढ़ रहे हैं तो सफलता की ओर अपना कदम बढाइये अभी 5 साल है आपके पास अपने जीवन मे परिवर्तन लाने के लिए एक अच्छी नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी तुरंत जॉइन कीजिये एक अच्छा लीडर अपने आस पास तलाश कीजिये और जितना हो सके सीखते हुए आगे बढिए सफलता आपका इंतज़ार कर रही हैं जीना है तो आज़ाद जिंदगी जिये वरना जीवन व्यर्थ है। मैं तो *OneAD* के साथ अपने भविष्य को सुरक्षित करने निकल चुका हूँ साथ चलना चाहते हैं तो तुरंत अपना स्मार्टफोन उठाइये *Google Playstore* से *OneAD* नाम की एप्पलीकेशन डाउनलोड कीजिये Open करके अपनी भाषा Select कीजिये अगले स्क्रीन पर अपना मोबाइल नंबर दर्ज कीजिये फिर उसके अगले स्क्रीन पर Refer Code में AH35EJH लिखिए OTP के जरिये अपना रेजिस्ट्रेशन पूरा कीजिये। और लग जाये लोगो को सफल बनाने में क्योंकि आपसे जुड़कर अगर लोग सफल हो गए तो आप अपने आप सफल हो जाएंगे।
अपना अमूल्य समय निकालकर मेरे द्वारा लिखे गए इस संदेश को पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

Sunday, 28 October 2018

अपने देश के लिए आपका कर्तव्य।।


कर्त्तव्य  शब्द की बात करें तो इसका माना होता है,"जिम्मेदारी"। आज हम इसी जिम्मेदारी की बात करने वाले हैं,कि हमारा , हमारे देश के प्रति क्या जिम्मेदारी है, और क्या हम अपनी जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा से पालन कर रहे हैं।
अगर मुझसे पूछा जाए तो मै कहुंगा "नहीं"। क्यों की हमारी जिम्मेदारी सिर्फ 5 साल में एक बार वोट डाल देने से खत्म नहीं होती है।आज के युग में इन्सान इतना व्यस्त हो गया है , कि उसे अपने आने वाले कल का कोई ख्याल और एहसास रह ही नही गया है। इन्सान बस अपने बारे में सोचने में व्यस्त है, मगर वो ये नहीं सोच रहा है कि वो अपने वाली पीढ़ी के लिए क्या कर रहा है, उन्हें किस तरह का समाज दे रहा है और उन्हें किस प्रकार का वातावरण देने की कोशिश कर रहा है। आज हम अधिकतर कामों के लिए दूसरों पर आश्रित हैं, मगर उन्ही अधिकतर कामों में कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें हम स्वंय करके एक मनमोहक समाज की व्यवस्था को जन्म दे सकते हैं, जैसे कि अपने आस पास की सफाई करके, उचित जगह पर वृक्षारोपण करके, पानी के निकासी की व्यवस्था करके, एक दूसरे के सुख-दुख में काम आ के , मगर हमें इन कामों के लिए फुरसत कहां। जहां तक मेरी सोच कहती है कि आज लोगों ने पैसे को इतनी ज्यादा अहमियत दे दी है कि उसके अलावा और कुछ नजर ही नहीं आता है। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि पैसे कमाना जरूरी नहींं है, जरूरी है मगर उसके साथ हमारी कुछ और जिम्मेदारियां भी है ंं अपने देश के प्रति, अपने समाज के प्रति   अपनी आने वाली पीढ़ी के प्रति। हम आज इस बात को ना समझे तो हम कागज के पन्नो पर तो विकासशील अर्थव्यवस्था नजर आएंगे मगर हकीकत में हमारा विकास कुछ न हो रहा होगा। 
आगे की बात अगले अध्याय में।।।।।।

Wednesday, 14 March 2018

वर्णन एक रात का।।।।।

एक रात का वर्णन एक मेरी खुद की कहानी का वर्णन करती है । ये बात उस समय की है जब मेरे दसवीं परीक्षा शुरू होने  का आखिरी रात थी ।उस रात मेरे उपर एक अलग ही कैफियत छायी हुई थी ।मन कही और था और दिमाग कही और । कुछ समझ मे नही आ रहा था कि क्या करू।दिल बड़ा बेचैन हो रहा था । मन मे एक सोच दौड़ लगा रही थी कि कल क्या होगा ।क्या मेरी तैयारी मुकम्मल है । क्या कल मै अपना बेस्ट दे पाउँगा । ये सवाल उठना भी वाजिब था क्योंकि इससे पहले न बोर्ड परीक्षा का कोई अनुभव था और न ही कोई मार्गदर्शक और ऊपर से घर से दूर रहकर अपने आप को वहाँ एडजस्ट करना ऐसी बहुत सारी चीज़े थी। ये  रात न जाने क्यों छोटी सी लग रही थी वक्त कैसे बीते जा रहा था पता ही नही चल रहा था पर अगर सच्चाई बताऊँ तो मन यही कर रहा था कि ये रात आज खत्म ही न हो । मगर कुदरत के बनाये हुए बदलते कहाँ है । चलिए जैसे -तैसे रात गुजरी सुबह की सफेदी नमूदार हुई। मन को अपने लक्ष्य की ओर रवाना कर दिया की अब आज चाहे जो भी देना अपना बेस्ट है और कुछ नही ।आगे जो होना है वो अपने बस में नही है। फिर क्या था पूरी शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ ।  जब सेन्टर पर पहुंचा तो चेकिंग के बाद सीधे अपने कमरे मे पहुंच गया और पेपर मिलने इन्तजार करता रहा लेकिन इस वक्त मै नर्वस बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि एक सज्जन ने मुझसे कहा था कि ये 15 मिनट अपने आप को सम्भाल कर रखना और मै ऐसा करने मे कामयाब रहा ।पेपर मिला उसे देखते ही दिल खुशियों से मचलने लगा।बस फिर क्या था मैने लिखना शुरू और करीब आधा घण्टा पहले मेरा पेपर कम्प्लीट हो गया। उसी दिन से डर खत्म मगर थोड़ी चिंता जरूर रहती है  

Saturday, 3 March 2018

SIKHSHA KA GIRTA ISTAR

आज मन कर रहा है की हमारे देश की शिक्षा की बात कर ली जाए।  इसके महत्व को जान लिया जाए।  इसकी जरुरत को समझ लिया जाए और हमारे जीवन इसका उपयोग क्या है , जी हाँ दोस्तों लेकिन जब हम इसकी बात करना शुरू करे उससे पहले हमें इसे दो भागों में बाट लेना चाहिए।

१. शहरी शिक्षा
२. ग्रामीण शिक्षा
ऐसा इसलिए क्यूंकि इन दोनों जगहों की शिक्षा में बहुत अंतर है.  हमारे देश में शहरी क्षेत्र में शिक्षा का हाल तो ठीक ठाक है मगर ग्रामीण स्तर पर अभी इसका इतना विकाश नहीं हो पाया है.  मेरे हिसाब से इसका सबसे बड़ा कारण ग्रामीण के लोगों की सोच भी है। दूसरी आमदनी का जरिया , और तीसरा माहोल। मेरे हिसाब ये तीन चीजें ज्यादा जिम्मेदार हैं इसके लिए।  सब  चीजों के बाद कुछ अगर तैयार भी रहते हैं तो उनको हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था तोड़ के रख देती है।  इस वक्त हमारे देश की सीख्शा व्यवस्था किसी छुपा नहीं है मगर कोई इस पर कुछ करने को तैयार  है। मगर इस व्यवस्था ने न जाने कितनो की जिन्दगियाँ  बर्बाद कर दी  / और साथ में जिनके पास सिर्फ पैसा था उनको इसी व्यवस्था ने अच्छे अच्छे पदों पर ले जाकर बैठा दिया है। ये बात मै सबके लिए नहीं कह रहा हूँ लेकिन कुछ ऐसे हैं जिनके पास ज्ञान काम था मगर पैसा ज्यादा था। मगर वही जो गरीब बच्चा था जिसने अपनी जवानी सिर्फ और सिर्फ पढ़ने में बिता दी अंत में आके उसे बेकार घूमना पड़ता हैं।  इसकी वजह की थी मेरे समझ से पैसा।  कभी कभी दिल टूट जाता कोई अपनी जिंदगी के २०-२५ साल इसी में गुजार देता है लेकिन अंत में उसे कुछ हासिल नहीं होता है भले ही उसके पास ज्ञान का भंडार पडा हो।  आज हमारे देश में नौकरियों को बेचा जाता है , रेट फिक्स किया जाता है। आइये रुपया दीजिये और जोइनिंग लेटर ले जाईये। इस बात का मेरे पास सबूत नहीं है लेकिन मुझे नहीं लगता  कोई इस बात से इत्तिफाक नहीं रखता है।
मै खुद अपनी बात करूँ तो मैंने भी अपनी जिंदगी के २१ साल इसी में गुजार दिए मगर अभी तक बेकार बैठा हूँ लेकिन वहीँ पर मै  देखता हूँ  की मेरे साथ पढ़ने वाले जिन्होंने १० - १२  में पढाई छोड़ दी थी आज जब मई उनसे मिलता हूँ तो अपने आप को बहुत पीछे पता हूँ , क्यूंकि वो १०  और १२ तक पढ़कर आज अच्छे खासे पैसे कमा  रहे हैं और मेरी हालत ये है की ठीक ढंग से अपनी भी जिम्मेदारियां नहीं उठा पा रहा हूँ। मगर एक उम्मीद है काश हमारी  शिक्षा व्यस्था फिर से वही ९० के दसक वाली हो जाए
मै  इस बात को इस लिए नहीं कर रहा सिलेबस बदला जाये जी नहीं मगर हमअरे देश जो नौकरियों का माहोल है वो बदला जाए , जो उस पद के लिए वाकई में काबिल है। 

Wednesday, 21 February 2018

EK ANOKHA ANUBHAV (A SELF EXPERIENCE)


बातें तो बहुत हैं आप से कहने के लिए लेकिन सब कह नहीं सकता।  हाँ लेकिन कुछ बातें आज  आप से बांटना चाहता हूँ।  जिंदगी भी एक सफर की ही तरह हर मोड़ पर एक नयी दुनिया दिखाती है।  आप घूमते रहिये और दुनिया का नजारा करते रहिये। लेकिन हर दिन आप को एक नया दृश्य दिखाई देगा।  इसी दुनिया में हम देखते हैं की लोग ख़ुशी ख़ुशी अपनी जिंदगी गुजरते हैं और वहीँ पर कुछ लोगों के लिए जिंदगी श्राप बन जाती है। कुछ लोग इस जिंदगी का आनंद उठाते हैं और कुछ इसी को पाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी गुजार देते हैं।  हाँ जी कुछ ऐसी ही है  हमारी  जिंदगी है। कभी कभी  सोचता हूँ की आखिर मै  इस दुनिया में आया क्यों हूँ , और कभी कभी सोचता आखिर मुझे इस दूनिया से जाना क्यू है। मगर इस दुनिया में वही सख्स कामयाब हैं जिन्होंने इन बातों को भूलकर अपनी छोटी सी मिली हुवी जिंदगी को अनमोल मान कर इसको सुधारने और बनाने में लग गए। मगर वो सख्स जिन्होंने अपनी जिंदगी की डोर को कल पर छोड़ दिया वो आज भी कल का इंतज़ार कर रहे हैं। इन्शान का जन्म होता तब उसे इस दुनिया की रत्ती भर की जानकारी नहीं होती थी अपने परिवार और अपने माता पिता के संरक्षण में अपनी जिंदगी की शुरुआत करता है और वक्त के साथ दुनिया को समझने की कोशिश करता है। अब कुछ को अच्छा माहोल मिल जाता है और आराम की जिंदगी गुजारते हैं मगर कुछ की पारिवारिक आर्थिक स्तिथि इतनी अच्छी नहीं होती है मगर फिर भी वो इतना काबिल हो जाता की वो दुनिया को समझ सके। अब इसके बाद उसके शिक्षा का समय आता हैं। ये समय हर बच्चे का ऐसा समय होता ःजब उसे अपनी  दिशा निर्देश मिलता है  या यूँ कहें की उसके जीवनकाल में भविष्य में क्या होगा उसका दिशा निर्धारण होता है। इस वक्त  माता पिता को चाहिए बच्चे का ध्यान अधिक रखें और उसे पढ़ाई को ओर  आकर्षित करें। अगर हो सके तो ट्युशन की व्यवस्था कर दे अगर ये नहीं हो सकता तो खुद काम से काम १ घंटा का समय उसे रोजाना दें।  अगर आप ने शुरुवाती दिनों में ये काम कर दिया तो यकीन मानिये की आपने उसके भविस्य  बुनियाद बहुत ही मजबूत कर दी है। 
आगे नेक्स्ट पोस्ट में। ...... 

Sunday, 18 February 2018

BHARAT KI POLITICS(BHARAT KI RAJNITI)

आज बात  हैं हमारे देश के पॉलिटिक्स की इसकी परिस्तिथि , व्यवस्था और सरकार।
आज के  युग में हर कोई राजनिति में आना   चाहता है चाहे  हो पढ़ा लिखा हो  या फिर सिर्फ सिग्नेचर करना ही सिर्फ  आता   हो  क्यूंकि आमदनी ही इतनी हो गयी।  किसी परिवार का एक आदमी एक विधायक बन जाए बस उसके बाद उसको और उसके परिवार को कुछ सोचने की जरुरत  नहीं। आज के युग मेरा मानना है की देश  में राजनेता नहीं बल्कि  सब के सब  राजनीतिज्ञ हैं। ऐसा  इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि आज के युग में जीतना ही सब कुछ है  चाहे उन्हें किसी भी हद तक जाना पड़े , छाये जितने भी वादे करने पड़े इससे गुरेज नहीं करेंगे।  चाहे हक़ीक़त में उस काम को करने की कैपेसिटी उनके पास  हो या न हो बस लच्छे दार भाषण देना आना चाहिए  . ये सिर्फ एक पार्टी विशेष की बात नहीं है बल्कि हर किसी का यही दस्तूर बन गया है , जनता के बीच आकर और उनका मत लेकर सरकार बनाना हर कोई चाहता है लेकिन सरकार बनाने के बाद उसी जनता की कोई बात सुनने को तैयार नहीं रहता है। ४ सालो तक सरकार  में रहकर अपने मनमाफिक सरकार चलाते हैं और उसके बाद जब फिर १ साल बचता है तो फिर उन्ही वादों के साथ उसी जनता के बीच आकर फिर वोट के लिए अपील करते हैं। अब जनता करे भी तो क्या करे अगर इनको सत्ता से हटाती और दूसरी पार्टी को जीताती है इस उम्मीद के साथ की शायद  हमारे बेहतरी के लिए ये कुछ करे। लेकिन अंत में होता क्या है इनका  भी हाल वही हो जाता है। ये भी चाहते हैं जितना हो सके अपना विकास करलो जनता की जब बात आएगी तब दूसरी पार्टी ने ये किया था ,  वो किया था इसलिए  सिस्टम को सुधारने  लिए   टाइम चाहिए  इस बात का आश्वासन देते रहेंगे ।  टाइम मांगते मांगते पूरा वक्त गुजर जाता है।  बेचारी जनता वही कि
वहीँ खड़ी  दिखाई देती हैं  लेकिन उन्होंने जिन्हे चुनकर विधानसभा भेजा था उनको देखा जाए तो उनका असीमित विकाश हो जाता है। कही पर फला साहब का डिग्री कॉलेज है ,कही पर फला साहब का हॉस्पिटल है , कहीं पर फ्ला  साहब का पेट्रोल पम्प है।   इनका  सिर्फ विकाश ही  विकाश दिखाई देता है 

Saturday, 17 February 2018

INDIA'S FUTURE (BHARAT KA BHAVISHYA)

फ्यूचर एक ऐसा सब्द है जिसके बारे में हर कोई जाना चाहता है। इसकी हर किसी को चिंता होती है क्यूंकि हर कोई चाहता है की उसका और उसके परिवार का भविष्य अच्छा हो। चाहे वह इन्शान कम  कमाता हो या दुसरो की अपेछा अधिक , ये उसकी चिंता और जिम्मेदारी दोनों है। कुछ इस रेस को बहुत आसानी से जीत लेते हैं मगर वही पर कुछ लोग ऐसे जो बहुत कुछ करने के बाद भी कुछ नहीं कर पाते। अब आखिर  इन दोनों तरह के  लोगों में फर्क क्या होता है ? ये सोचने योग्य विषय है।  इस पर आप जरूर सोचियेगा।

आज हमारे देश की हालत क्या है , हर कोई अपना उल्लू सीधा करना चाहता है चाहे उसे कोई   रास्ता भी अपनाना  पड़े उसके लिए एक पल भी नहीं सोचते बस कर गुजरते हैं।  देश में जहाँ देखो लूट पात मची हुवी है कौन किसी पाए और उससे सब कुछ छीन ले। ये लोग उस शख्स के बारे में जरा सा भी नहीं सोचते की आखिर उसने ये पैसे कितने मेहनतो से कमाया था। कितना अपने जिस्म का खून पसीने के रूप में बहाया था।  ये जनाब आये और एक पल में उस इन्शान को जिंदगी भर के लिए एक अफ़सोस और गम में रहने का जरिया फ़राहम कर दिया।  जरा सोचिये क्या बीती होगी उस सख्स पे जिसने अपना सब कुछ खो दिया था। क्या होगा उसके उन अरमानो का जो उसने अपने भविष्य के लिए देखा था।  

Wednesday, 14 February 2018

EXAM TIME (PARIKSHA KA SAMAY).

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एग्जाम टाइम , ये सब्द सुनके ही अलग कैफियत पैदा होती  है ,खासकर उन लोगो के चेहरे पर जिनका एग्जाम होने वाला है, क्यूंकि ये समय  ऐसा होता ही  है चाहे बच्चे ने कितनी  ही अच्छी पढाई कर रखी हो.. आज  भी याद है मुझे मेरे एग्जाम का समय जैसे जैसे करीब होता था वैसे ही दिमाग में एक अलग ही सोच होती थी।  मन में अलग अलग तरह के सवाल उठते थे ,एग्जाम कैसे होगा , क्या  तय्यरी पूरी हुवी है,  क्या मै  कुछ और तैयार कर सकता हूँ , क्या तय्यरी के लिए पर्याप्त समय दिया है। इन सब सवालो के बाद  बच्चा पेपर देने जाता है और अगर पेपर बढ़िया हो गया तो एक अलग ही सुकून मिलता है  और इन सारे सवालो से  बेफिक्र हो जाता है , लेकिन एक दिन और भी होता जिस दिन  बच्चे को कुछ ज्यादा ही उलझन होती क्यूंकि वो दिन रिजल्ट का दिन होता है।  उस दिन  बच्चे के साल भर के मेहनत  परिणाम मिलता है। बच्चा कितना भी अच्छा पेपर करके आया हो लेकिन  उस दिन वह नर्वस जरूर होता है। www.xtylishproduction.cu.ma 

Wednesday, 7 February 2018

AAJ KA SAMAY !!!!

आज का युग कहा जाता है की एक अत्याधुनिक युग है , मानव ने आज के युग में बहुत ही उपलब्धियाँ हाशिल की है , इन्शान ने अपने रहने से लेकर खाने पीने तक में बदलाव किया है।  आज के कुछ वर्षों पहले टेक्नोलोजी इतनी डेवलॅप नहीं हुवी थी। अगर किसी को किसी की कोई खबर देनी होती थी तो उसे सोचना पड़ता था की ये कब पहुंचेगा और कैसे पहुंचेगा। इसी सोच की वजह से डाक सेवा की शुरुआत हुई और पत्र के माध्यम से इन्शान अपने सूचनाओ को दुसरो तक पहुँचाने लगा , लेकिन शायद ये पर्याप्त नहीं था क्यूँकि इस व्यवस्था में भी पत्र को पहुँचते - पहुँचते महीनो बीत जाते थे जिसके ये आभाष हुवा की हमें और बदलाव की जरुरत है।  इस्पे मानव ने गहन अध्धयन किया और इस पर कार्य करना शुरू किया। तमाम प्रयासो के बाद आख़िरकार वो दिन आगया जब एक इंशान( वैज्ञानिक) ने मोबाइल फ़ोन का अविष्कार हुवा।  इस आविष्कार ने मानव जीवन  में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया। जिस खबर को पहले पहुँचाने में महीनो लग जाते थे उस खबर को अब मिनटों में पहुँचाया जा सकता था। इसलिए अगर हम इस युग को टेक्नोलॉजी का युग कहे तो शायद इसमें किसी की दो राय नहीं होगी। लेकिन इस टेक्नोलॉजी के युग में इसका जितना विकास हो रहा है उतना!!!!!!!!!!!!

Monday, 5 February 2018

Aap kya sochte hoon?

आज हम सब एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ टेक्नोलॉजी को बहुत महत्व दिया जाता है।
इसीलिए हम सब इसको जानने के लिए बहुत उत्शुक रहते हैं और शायद जरुरी भी है, लेकिन इस टेक्नोलॉजी की दुनिया में हम इतना खो गए हैं की हमने अपनी संस्कृति , आपसी प्रेम और सुखी जीवन को भूल गए हैं।
की कल हम कैसे जीते थे।  पहले लोग कम कमाते थे मगर आज की अपेछा अधिक खुश रहते थे क्यूंकि वो पैसे से ज्यादा रिश्तों को अहमियत देते थे , मगर आज हालत उसके तुलना में उल्टा है,. आज के युग लोग पैसो को ज्यादा अहमियत देते हैं मगर रिश्तो के लिए उनके पास टाइम ही नहीं रहता है. आप सोचे और गौर करें क्या ऐसा ही रहेगा हमारा कल, ऐसे ही बीते गी हमारी जिंदगी।