कर्त्तव्य शब्द की बात करें तो इसका माना होता है,"जिम्मेदारी"। आज हम इसी जिम्मेदारी की बात करने वाले हैं,कि हमारा , हमारे देश के प्रति क्या जिम्मेदारी है, और क्या हम अपनी जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा से पालन कर रहे हैं।
अगर मुझसे पूछा जाए तो मै कहुंगा "नहीं"। क्यों की हमारी जिम्मेदारी सिर्फ 5 साल में एक बार वोट डाल देने से खत्म नहीं होती है।आज के युग में इन्सान इतना व्यस्त हो गया है , कि उसे अपने आने वाले कल का कोई ख्याल और एहसास रह ही नही गया है। इन्सान बस अपने बारे में सोचने में व्यस्त है, मगर वो ये नहीं सोच रहा है कि वो अपने वाली पीढ़ी के लिए क्या कर रहा है, उन्हें किस तरह का समाज दे रहा है और उन्हें किस प्रकार का वातावरण देने की कोशिश कर रहा है। आज हम अधिकतर कामों के लिए दूसरों पर आश्रित हैं, मगर उन्ही अधिकतर कामों में कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें हम स्वंय करके एक मनमोहक समाज की व्यवस्था को जन्म दे सकते हैं, जैसे कि अपने आस पास की सफाई करके, उचित जगह पर वृक्षारोपण करके, पानी के निकासी की व्यवस्था करके, एक दूसरे के सुख-दुख में काम आ के , मगर हमें इन कामों के लिए फुरसत कहां। जहां तक मेरी सोच कहती है कि आज लोगों ने पैसे को इतनी ज्यादा अहमियत दे दी है कि उसके अलावा और कुछ नजर ही नहीं आता है। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि पैसे कमाना जरूरी नहींं है, जरूरी है मगर उसके साथ हमारी कुछ और जिम्मेदारियां भी है ंं अपने देश के प्रति, अपने समाज के प्रति अपनी आने वाली पीढ़ी के प्रति। हम आज इस बात को ना समझे तो हम कागज के पन्नो पर तो विकासशील अर्थव्यवस्था नजर आएंगे मगर हकीकत में हमारा विकास कुछ न हो रहा होगा।
आगे की बात अगले अध्याय में।।।।।।
आगे की बात अगले अध्याय में।।।।।।

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