Saturday, 21 December 2019

पढ़ो और महसूस करो।

आपने शीर्षक देखा होगा तो जरूर सोचा होगा कि आखिर क्या लिखा गया है जो महसूस करने के लिए कहा जा रहा है, जी तो मैं यहां शुरुआत में ही बता दूं कि मैं कोई खजाने के राज का जिक्र करने नहीं जा रहा हूं। बस आपके और हमारे जीवन में होने वाले कुछ चीजों का वर्णन करने की कोशिश मात्र कर रहा हूं। व्यक्ति के जीवन की शुरुआत बचपन से होती है, उसी बचपन को आज हमें बड़े होने के बाद ये कहें कि इंसान का बचपन उसके जिन्दगी का स्वर्णिम काल था तो शायद कोई इंकार नहीं करेंगा। ............... 
चलिए जहां से छोडा था वहि से शुरु करते है, इन्सान जब छोटा होता है तब वो बडा हि मासुम होता है, दुनियदारी कि उसे ज्यादा फ़िक्र नहि होति है।  लेकिन वकत के साथ दुनिया बदलती जा रही है, इन्सान बच्पन से लेकर बुडपे तक टेन्सन मे डुबा हुवा है, ऐसे तो नहि थी पह्ले कि जिन्दगी ,लोग खुसी खुसी रेह्ते थे ,लोग कमाते कम थे मगर खुश ज्यदा रह्ते थे, लेकिन आज हम ज्यदा कमा रहे है' मगर वो खुसी नही मिल पा रही है आखिर क्यु , इस्का मुझे जो कारड नजर आ रहा है वो कि हम्ने अब रिश्तो से ज्यदा पैसो को तर्जिह देन शुरु कर दिया है,
इसी पैसे के कारन आज  भाई भाई का दुश्मन बना हुवा है , एक दोस्त दुस्रे  दोस्त से मिल्ने को राजी नही कि कही पैसो के लिये जबान न डाल दे .।।।।।।।।।।।।

Saturday, 11 May 2019

एक नज़र आज की शादियों पर।

शादी की बात करें तो इंसान के जीवन का वह अहम हिस्सा है जिसके होने से इंसान की जिंदगी में परिवर्तन होना अनिवार्य सा हो जाता है। अनेकों बदलाव उसके दीनचर्या में देखने को मिलती है, जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। शादी का हमारी जिंदगी में इतना महत्व होने के बावजूद आज जो शादी करने का माहौल और तरीका देखने को मिल रहा है वो अत्यंत सोचनीय है या कहें दयनीय है। आज के दौर में शादियों को इतना महंगा बना दिया गया जिस के बारे में सोचकर एक गरीब तो गरीब हैं , अच्छे अच्छों की आहें निकल जाती है। जैसे की अधिक कीमत मंगना या दहेज में अधिकतर सामान मंगना।और बढ़ती मंहगाई से शादियां करने पर सोचना पड़ रहा है। आज के दौर में हमारे समाज में दहेज की ऐसी भयावह बीमारी फैल गई जिसकी वजह से न जाने कितनी बहन-बेटीयों की शादियां नहीं हो पा रही है, इसी दहेज के लिए न जाने कितनी बहन-बेटीयों को शादी के बाद भी प्रताड़ित (परेशान) किया जा रहा है। वाह रे! हमारे समाज के लोगों क्या भविष्य दे रहे हो आप अपनी आने वाली पीढ़ी को। किस भयावह समाज का निर्माण कर रहे हो। एक एक बारात में ३००-४०० लोगों का जाना और गलती से बेचारे घर वालों से कुछ गलती हो जाये तो सरेआम उनके इज्जत की पगड़ी उछालना। अरे जो खुद कमा कर अपनी जिंदगी न गुजार सका वो किसी कुछ लेकर कहा ंं अपनी जिंदगी व्यतीत कर पायेगा। शर्म करो ऐ दहेज के लालचियों तुम्हारे घर में भी बेटियां होगी।

Tuesday, 12 February 2019

Punya prashun bajpai

wakt badlega , soch badlegi, inshaan badlega
वक्त बदलेगा , सोच बदलेगी, इंसान बदलेगा।
  1. https://youtu.be/SN_BL0a2LnA