आगे नेक्स्ट पोस्ट में। ......
Wednesday, 21 February 2018
EK ANOKHA ANUBHAV (A SELF EXPERIENCE)
Sunday, 18 February 2018
BHARAT KI POLITICS(BHARAT KI RAJNITI)
आज बात हैं हमारे देश के पॉलिटिक्स की इसकी परिस्तिथि , व्यवस्था और सरकार।
आज के युग में हर कोई राजनिति में आना चाहता है चाहे हो पढ़ा लिखा हो या फिर सिर्फ सिग्नेचर करना ही सिर्फ आता हो क्यूंकि आमदनी ही इतनी हो गयी। किसी परिवार का एक आदमी एक विधायक बन जाए बस उसके बाद उसको और उसके परिवार को कुछ सोचने की जरुरत नहीं। आज के युग मेरा मानना है की देश में राजनेता नहीं बल्कि सब के सब राजनीतिज्ञ हैं। ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि आज के युग में जीतना ही सब कुछ है चाहे उन्हें किसी भी हद तक जाना पड़े , छाये जितने भी वादे करने पड़े इससे गुरेज नहीं करेंगे। चाहे हक़ीक़त में उस काम को करने की कैपेसिटी उनके पास हो या न हो बस लच्छे दार भाषण देना आना चाहिए . ये सिर्फ एक पार्टी विशेष की बात नहीं है बल्कि हर किसी का यही दस्तूर बन गया है , जनता के बीच आकर और उनका मत लेकर सरकार बनाना हर कोई चाहता है लेकिन सरकार बनाने के बाद उसी जनता की कोई बात सुनने को तैयार नहीं रहता है। ४ सालो तक सरकार में रहकर अपने मनमाफिक सरकार चलाते हैं और उसके बाद जब फिर १ साल बचता है तो फिर उन्ही वादों के साथ उसी जनता के बीच आकर फिर वोट के लिए अपील करते हैं। अब जनता करे भी तो क्या करे अगर इनको सत्ता से हटाती और दूसरी पार्टी को जीताती है इस उम्मीद के साथ की शायद हमारे बेहतरी के लिए ये कुछ करे। लेकिन अंत में होता क्या है इनका भी हाल वही हो जाता है। ये भी चाहते हैं जितना हो सके अपना विकास करलो जनता की जब बात आएगी तब दूसरी पार्टी ने ये किया था , वो किया था इसलिए सिस्टम को सुधारने लिए टाइम चाहिए इस बात का आश्वासन देते रहेंगे । टाइम मांगते मांगते पूरा वक्त गुजर जाता है। बेचारी जनता वही कि
वहीँ खड़ी दिखाई देती हैं लेकिन उन्होंने जिन्हे चुनकर विधानसभा भेजा था उनको देखा जाए तो उनका असीमित विकाश हो जाता है। कही पर फला साहब का डिग्री कॉलेज है ,कही पर फला साहब का हॉस्पिटल है , कहीं पर फ्ला साहब का पेट्रोल पम्प है। इनका सिर्फ विकाश ही विकाश दिखाई देता है
आज के युग में हर कोई राजनिति में आना चाहता है चाहे हो पढ़ा लिखा हो या फिर सिर्फ सिग्नेचर करना ही सिर्फ आता हो क्यूंकि आमदनी ही इतनी हो गयी। किसी परिवार का एक आदमी एक विधायक बन जाए बस उसके बाद उसको और उसके परिवार को कुछ सोचने की जरुरत नहीं। आज के युग मेरा मानना है की देश में राजनेता नहीं बल्कि सब के सब राजनीतिज्ञ हैं। ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि आज के युग में जीतना ही सब कुछ है चाहे उन्हें किसी भी हद तक जाना पड़े , छाये जितने भी वादे करने पड़े इससे गुरेज नहीं करेंगे। चाहे हक़ीक़त में उस काम को करने की कैपेसिटी उनके पास हो या न हो बस लच्छे दार भाषण देना आना चाहिए . ये सिर्फ एक पार्टी विशेष की बात नहीं है बल्कि हर किसी का यही दस्तूर बन गया है , जनता के बीच आकर और उनका मत लेकर सरकार बनाना हर कोई चाहता है लेकिन सरकार बनाने के बाद उसी जनता की कोई बात सुनने को तैयार नहीं रहता है। ४ सालो तक सरकार में रहकर अपने मनमाफिक सरकार चलाते हैं और उसके बाद जब फिर १ साल बचता है तो फिर उन्ही वादों के साथ उसी जनता के बीच आकर फिर वोट के लिए अपील करते हैं। अब जनता करे भी तो क्या करे अगर इनको सत्ता से हटाती और दूसरी पार्टी को जीताती है इस उम्मीद के साथ की शायद हमारे बेहतरी के लिए ये कुछ करे। लेकिन अंत में होता क्या है इनका भी हाल वही हो जाता है। ये भी चाहते हैं जितना हो सके अपना विकास करलो जनता की जब बात आएगी तब दूसरी पार्टी ने ये किया था , वो किया था इसलिए सिस्टम को सुधारने लिए टाइम चाहिए इस बात का आश्वासन देते रहेंगे । टाइम मांगते मांगते पूरा वक्त गुजर जाता है। बेचारी जनता वही कि
वहीँ खड़ी दिखाई देती हैं लेकिन उन्होंने जिन्हे चुनकर विधानसभा भेजा था उनको देखा जाए तो उनका असीमित विकाश हो जाता है। कही पर फला साहब का डिग्री कॉलेज है ,कही पर फला साहब का हॉस्पिटल है , कहीं पर फ्ला साहब का पेट्रोल पम्प है। इनका सिर्फ विकाश ही विकाश दिखाई देता है
Saturday, 17 February 2018
INDIA'S FUTURE (BHARAT KA BHAVISHYA)
फ्यूचर एक ऐसा सब्द है जिसके बारे में हर कोई जाना चाहता है। इसकी हर किसी को चिंता होती है क्यूंकि हर कोई चाहता है की उसका और उसके परिवार का भविष्य अच्छा हो। चाहे वह इन्शान कम कमाता हो या दुसरो की अपेछा अधिक , ये उसकी चिंता और जिम्मेदारी दोनों है। कुछ इस रेस को बहुत आसानी से जीत लेते हैं मगर वही पर कुछ लोग ऐसे जो बहुत कुछ करने के बाद भी कुछ नहीं कर पाते। अब आखिर इन दोनों तरह के लोगों में फर्क क्या होता है ? ये सोचने योग्य विषय है। इस पर आप जरूर सोचियेगा।
आज हमारे देश की हालत क्या है , हर कोई अपना उल्लू सीधा करना चाहता है चाहे उसे कोई रास्ता भी अपनाना पड़े उसके लिए एक पल भी नहीं सोचते बस कर गुजरते हैं। देश में जहाँ देखो लूट पात मची हुवी है कौन किसी पाए और उससे सब कुछ छीन ले। ये लोग उस शख्स के बारे में जरा सा भी नहीं सोचते की आखिर उसने ये पैसे कितने मेहनतो से कमाया था। कितना अपने जिस्म का खून पसीने के रूप में बहाया था। ये जनाब आये और एक पल में उस इन्शान को जिंदगी भर के लिए एक अफ़सोस और गम में रहने का जरिया फ़राहम कर दिया। जरा सोचिये क्या बीती होगी उस सख्स पे जिसने अपना सब कुछ खो दिया था। क्या होगा उसके उन अरमानो का जो उसने अपने भविष्य के लिए देखा था।
Wednesday, 14 February 2018
EXAM TIME (PARIKSHA KA SAMAY).
www.xtylishproduction.cu.ma
एग्जाम टाइम , ये सब्द सुनके ही अलग कैफियत पैदा होती है ,खासकर उन लोगो के चेहरे पर जिनका एग्जाम होने वाला है, क्यूंकि ये समय ऐसा होता ही है चाहे बच्चे ने कितनी ही अच्छी पढाई कर रखी हो.. आज भी याद है मुझे मेरे एग्जाम का समय जैसे जैसे करीब होता था वैसे ही दिमाग में एक अलग ही सोच होती थी। मन में अलग अलग तरह के सवाल उठते थे ,एग्जाम कैसे होगा , क्या तय्यरी पूरी हुवी है, क्या मै कुछ और तैयार कर सकता हूँ , क्या तय्यरी के लिए पर्याप्त समय दिया है। इन सब सवालो के बाद बच्चा पेपर देने जाता है और अगर पेपर बढ़िया हो गया तो एक अलग ही सुकून मिलता है और इन सारे सवालो से बेफिक्र हो जाता है , लेकिन एक दिन और भी होता जिस दिन बच्चे को कुछ ज्यादा ही उलझन होती क्यूंकि वो दिन रिजल्ट का दिन होता है। उस दिन बच्चे के साल भर के मेहनत परिणाम मिलता है। बच्चा कितना भी अच्छा पेपर करके आया हो लेकिन उस दिन वह नर्वस जरूर होता है। www.xtylishproduction.cu.maWednesday, 7 February 2018
AAJ KA SAMAY !!!!
आज का युग कहा जाता है की एक अत्याधुनिक युग है , मानव ने आज के युग में बहुत ही उपलब्धियाँ हाशिल की है , इन्शान ने अपने रहने से लेकर खाने पीने तक में बदलाव किया है। आज के कुछ वर्षों पहले टेक्नोलोजी इतनी डेवलॅप नहीं हुवी थी। अगर किसी को किसी की कोई खबर देनी होती थी तो उसे सोचना पड़ता था की ये कब पहुंचेगा और कैसे पहुंचेगा। इसी सोच की वजह से डाक सेवा की शुरुआत हुई और पत्र के माध्यम से इन्शान अपने सूचनाओ को दुसरो तक पहुँचाने लगा , लेकिन शायद ये पर्याप्त नहीं था क्यूँकि इस व्यवस्था में भी पत्र को पहुँचते - पहुँचते महीनो बीत जाते थे जिसके ये आभाष हुवा की हमें और बदलाव की जरुरत है। इस्पे मानव ने गहन अध्धयन किया और इस पर कार्य करना शुरू किया। तमाम प्रयासो के बाद आख़िरकार वो दिन आगया जब एक इंशान( वैज्ञानिक) ने मोबाइल फ़ोन का अविष्कार हुवा। इस आविष्कार ने मानव जीवन में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया। जिस खबर को पहले पहुँचाने में महीनो लग जाते थे उस खबर को अब मिनटों में पहुँचाया जा सकता था। इसलिए अगर हम इस युग को टेक्नोलॉजी का युग कहे तो शायद इसमें किसी की दो राय नहीं होगी। लेकिन इस टेक्नोलॉजी के युग में इसका जितना विकास हो रहा है उतना!!!!!!!!!!!!
Monday, 5 February 2018
Aap kya sochte hoon?
आज हम सब एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ टेक्नोलॉजी को बहुत महत्व दिया जाता है।
इसीलिए हम सब इसको जानने के लिए बहुत उत्शुक रहते हैं और शायद जरुरी भी है, लेकिन इस टेक्नोलॉजी की दुनिया में हम इतना खो गए हैं की हमने अपनी संस्कृति , आपसी प्रेम और सुखी जीवन को भूल गए हैं।
की कल हम कैसे जीते थे। पहले लोग कम कमाते थे मगर आज की अपेछा अधिक खुश रहते थे क्यूंकि वो पैसे से ज्यादा रिश्तों को अहमियत देते थे , मगर आज हालत उसके तुलना में उल्टा है,. आज के युग लोग पैसो को ज्यादा अहमियत देते हैं मगर रिश्तो के लिए उनके पास टाइम ही नहीं रहता है. आप सोचे और गौर करें क्या ऐसा ही रहेगा हमारा कल, ऐसे ही बीते गी हमारी जिंदगी।
इसीलिए हम सब इसको जानने के लिए बहुत उत्शुक रहते हैं और शायद जरुरी भी है, लेकिन इस टेक्नोलॉजी की दुनिया में हम इतना खो गए हैं की हमने अपनी संस्कृति , आपसी प्रेम और सुखी जीवन को भूल गए हैं।
की कल हम कैसे जीते थे। पहले लोग कम कमाते थे मगर आज की अपेछा अधिक खुश रहते थे क्यूंकि वो पैसे से ज्यादा रिश्तों को अहमियत देते थे , मगर आज हालत उसके तुलना में उल्टा है,. आज के युग लोग पैसो को ज्यादा अहमियत देते हैं मगर रिश्तो के लिए उनके पास टाइम ही नहीं रहता है. आप सोचे और गौर करें क्या ऐसा ही रहेगा हमारा कल, ऐसे ही बीते गी हमारी जिंदगी।
Subscribe to:
Posts (Atom)






