आपने शीर्षक देखा होगा तो जरूर सोचा होगा कि आखिर क्या लिखा गया है जो महसूस करने के लिए कहा जा रहा है, जी तो मैं यहां शुरुआत में ही बता दूं कि मैं कोई खजाने के राज का जिक्र करने नहीं जा रहा हूं। बस आपके और हमारे जीवन में होने वाले कुछ चीजों का वर्णन करने की कोशिश मात्र कर रहा हूं। व्यक्ति के जीवन की शुरुआत बचपन से होती है, उसी बचपन को आज हमें बड़े होने के बाद ये कहें कि इंसान का बचपन उसके जिन्दगी का स्वर्णिम काल था तो शायद कोई इंकार नहीं करेंगा। ...............
चलिए जहां से छोडा था वहि से शुरु करते है, इन्सान जब छोटा होता है तब वो बडा हि मासुम होता है, दुनियदारी कि उसे ज्यादा फ़िक्र नहि होति है। लेकिन वकत के साथ दुनिया बदलती जा रही है, इन्सान बच्पन से लेकर बुडपे तक टेन्सन मे डुबा हुवा है, ऐसे तो नहि थी पह्ले कि जिन्दगी ,लोग खुसी खुसी रेह्ते थे ,लोग कमाते कम थे मगर खुश ज्यदा रह्ते थे, लेकिन आज हम ज्यदा कमा रहे है' मगर वो खुसी नही मिल पा रही है आखिर क्यु , इस्का मुझे जो कारड नजर आ रहा है वो कि हम्ने अब रिश्तो से ज्यदा पैसो को तर्जिह देन शुरु कर दिया है,
इसी पैसे के कारन आज भाई भाई का दुश्मन बना हुवा है , एक दोस्त दुस्रे दोस्त से मिल्ने को राजी नही कि कही पैसो के लिये जबान न डाल दे .।।।।।।।।।।।।
Post full story please
ReplyDeleteTrying
DeleteMasha Allah
ReplyDeleteLikhte rahe
Insha Allah tarkki mile gi